कहो कहाँ तुम भागोगे
कहो कहाँ तुम भागोगे। सत्ता लोलुप भूल गये सब राष्ट्र धर्म का नाता जन गण मन अधिनायक जय हे भारत भाग्य विधाता। जिस सपने के खातिर झूले भगत सिंह थे फ़ाँसी लक्ष्मीबाई जूझ मरी इतिहास हो गया झाँसी। चला गया आजाद दिया जिसने हमको आजादी उसकी लाशों पर बैठे हम देख रहे बर्बादी। हम हैं कश्मीरी हिन्दु मत पूछो क्या क्या बीता वेद रामायण छीन लिये औ फूक दिये सब गीता। धन दौलत हम छोड़ के भागे लाज़ न बचने पायी बहन बेटियां जहर खा गई मांग न सजने पायी। अब भी अगर नहीं जागे तो बोलो कब तुम जागोगे अगर यहाँ कश्मीर हो गया कहो कहाँ तुम भागोगे।