आसुरी प्रवृत्तियाँ पराती जिस नाम से हैं तेजपुञ्ज बल में अकूत को प्रणाम है श्वाँस - श्वाँस विचरण करते सुभक्त बीच वायु रूप व्याप्त वायुपूत को प्रणाम है रामजी की आँख में विराजते जो आँजन सा अग्रगामी अञ्जना सपूत को प्रणाम है राम - धाम राम - काम राम में निसार प्राण करते सदैव रामदूत को प्रणाम है भूरि - भूरि भस्म जो करे कुभावना को नित्य भाव भंगिमा भरे भभूत को प्रणाम है आदि हैं अनन्त अविकारी अविनाशी चित आर्ष आशुतोष अवधूत को प्रणाम है दाह को मिटानेवाले आह को घटानेवाले वायु को प्रणाम वाय...