नयनों की प्याली में अमृत
नयनों की प्याली में अमृत
नयनों की प्याली में अमृत बार - बार तुमने परसा है।
लुक छिपकर तेरा वह मिलना
गन्धित पुष्प कली सा खिलना
कुंचित केशों का विन्यास
तेरे अधरों का मधुहास
याद मुझे है, लखने खातिर बार - बार ये मन तरसा है।
नयनों की प्याली में अमृत बार - बार तुमने परसा है।
चैत चाँदनी की वे रातें
तेरी मधुर - मधुर वे बातें
अमराई के मध्य बोलना
मीठा - मीठा दर्द घोलना
खेल - खेल में बीत गये दिन आखों ने सब कुछ दरसा है।
नयनों की प्याली में अमृत बार- बार तुमने परसा है ॥
खुश होना और कभी रिसाना
रोब देखाना और मनाना
बिन बोले तेरा रह जाना
आखों से सब कुछ कह जाना
तेरी मनवाली कर - करके , बार - बार ये मन हरषा है।
नयनों की प्याली में अमृत बार- बार तुमने परसा है ॥
रिस्ते नाते टूट गये सब
काफी पीछे छूट गये सब
हाथों को ही बस मलना है
निरा अकेले ही चलना है ।
जब -जब याद किया मैंने इन आखों से ही मन बरषा है।
नयनों की प्याली में अमृत बार- बार तुमने परसा है ॥
नयनों की प्याली में अमृत बार - बार तुमने परसा है।
लुक छिपकर तेरा वह मिलना
गन्धित पुष्प कली सा खिलना
कुंचित केशों का विन्यास
तेरे अधरों का मधुहास
याद मुझे है, लखने खातिर बार - बार ये मन तरसा है।
नयनों की प्याली में अमृत बार - बार तुमने परसा है।
चैत चाँदनी की वे रातें
तेरी मधुर - मधुर वे बातें
अमराई के मध्य बोलना
मीठा - मीठा दर्द घोलना
खेल - खेल में बीत गये दिन आखों ने सब कुछ दरसा है।
नयनों की प्याली में अमृत बार- बार तुमने परसा है ॥
खुश होना और कभी रिसाना
रोब देखाना और मनाना
बिन बोले तेरा रह जाना
आखों से सब कुछ कह जाना
तेरी मनवाली कर - करके , बार - बार ये मन हरषा है।
नयनों की प्याली में अमृत बार- बार तुमने परसा है ॥
रिस्ते नाते टूट गये सब
काफी पीछे छूट गये सब
हाथों को ही बस मलना है
निरा अकेले ही चलना है ।
जब -जब याद किया मैंने इन आखों से ही मन बरषा है।
नयनों की प्याली में अमृत बार- बार तुमने परसा है ॥
@ खेल - खेल में बीत गये दिन आखों ने सब कुछ दरसा है।
जवाब देंहटाएंनयनों की प्याली में अमृत बार- बार तुमने परसा है ॥
बहुत अद्भुत लिखते है आप, काफी कुछ सिखने को मिलेगा आपसे
वर्ड वेरिफिकेशन अगर हटा सकें तो ठीक रहेगा टिपण्णी करने में
जवाब देंहटाएंरिस्ते नाते टूट गये सब
जवाब देंहटाएंकाफी पीछे छूट गये सब
हाथों को ही बस मलना है
निरा अकेले ही चलना है ।
जब -जब याद किया मैंने इन आखों से ही मन बरषा है।
नयनों की प्याली में अमृत बार- बार तुमने परसा है ॥
...वाह !
आपको पा कर ब्लाग जगत धन्य हुआ.
बहुत कुछ पढने को मिलेगा.
आप अपनी कहानियों के लिये एक अलग ब्लाग बनायें तो अछ्हा लगेगा.
बहुत ही मनभावन गीत रचा है आपने तो!
जवाब देंहटाएंआपकी नई रचना का इंतजार है
जवाब देंहटाएंbahut sundar geet
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