अर्घ्य्र नयन से
अर्घ्य्र नयन से
पाँव हमारे गावं तुम्हारे वाले रस्ते बढ़ जाते हैं।
पवन झकोरों संग उड़-उड़ कर
अन्शुमालिनी पीछे मुड-कर
रेखाविद सी हस्त रेखाएं मेरी आकार पढ़ जाते है
पाँव हमारे गावं तुम्हारे वाले रस्ते बढ़ जाते हैं।
कौन भाग की बांचे पाती
कौन लुटाये जीवन थाती
अमराई में आते ही वे गीत पुराने कढ़ जाते हैं
पाँव हमारे गावं तुम्हारे वाले रस्ते बढ़ जाते हैं।
मेरा हाथ रहा है खाली
नहीं पास में पूजा थाली
गंगा जल की बात सोचते अर्घ्य्र नयन से कढ़ जाते हैं
पाँव हमारे गावं तुम्हारे वाले रस्ते बढ़ जाते हैं।
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