तीन दोहे
दर्पण के हो सामने जैसे कोई सूर .
वैसे विधवा माँग से दूर बहुत सिंदूर ..
अमराई में अब नहीं पहले जैसा छाँव
बात -बात में काटने दौ ड़ रहा है गाँव
रिश्ते अब मरने लगे टूट रहे सम्बन्ध
पैसों से ही हो रहा रिश्तों का अनुबन्ध
वैसे विधवा माँग से दूर बहुत सिंदूर ..
अमराई में अब नहीं पहले जैसा छाँव
बात -बात में काटने दौ ड़ रहा है गाँव
रिश्ते अब मरने लगे टूट रहे सम्बन्ध
पैसों से ही हो रहा रिश्तों का अनुबन्ध
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