पूर्वांचल की मस्ती
पूर्वांचल के कण –कण
में बिखरी पूर्वांचल की मस्ती
दिया देश को
पूर्वांचल ने नेक - अनेक बड़ी हस्ती |
मंगल ने मंगलाचरण कर
स्वतंत्रता का बिगुल बजाया
श्यामनारायण पाण्डेय
ने हल्दीघाटी सा - काव्य सजाया |
लक्ष्मी नारायण
मिश्रा ने लिखा ऐतिहासिक नाटक
राहुल सांकृत्यायन
खोले शास्त्र घुमक्कण का फाटक |
सिंह अयोध्या हरिऔध
ने दिया राष्ट्र को पंचवटी
क्रांतिकारियों से
मत पूछो कैसे उनकी सजा कटी |
भोलानाथ गहमरी
,मोती बी .ए .कविवर राही
जिनके बल पर भोजपुरी
है लूट रही वह - वाही |
इस मिट्टी ने दिया
विश्व को गौतम बुद्ध महा मानव
और राम - सा अवतारी
जिससे हारे सारे दानव |
इसके उत्तर में पहरू
बन पर्वत खड़ा हिमालय है
शास्त्र तंत्र का
सिद्ध पीठ गोरक्ष नाथ देवालय है |
सागर सी गहराई वाली
एक अनोखी नगरी है
पूर्वांचल में बसी
हुई ऎसी ही काशी - नगरी है |
इस नगरी ने हिन्दी
को है दिया अनेकों लेखक
भारतेन्दु ,जयशंकर
,मुंशी प्रेमचंद अन्वेषक |
काशी के उत्तर में
स्थित सारनाथ अवशेष अभी
गौतम बुद्ध ने सबसे
पहले दिया यहीं उपदेश कभी |
ऎसी इस मनभावन –
पावन मिट्टी की बलिहारी
बाणभट्ट की आत्मकथा
लिख दिये प्रसाद हजारी |
राजनीति में
चंद्रशेखर सिंह पूर्वांचल के नेता
प्रखर ओजस्वी
राजनीति सिद्धान्तों के अध्येता |
अल्हण अद्भुत हुआ
साहसी कल्पनाथ सा राजा
नगर-शहर हर गाँव बज
रहा जिसके यश का बाजा |
जिसकी कर्मठता
अद्भुत थी अनुपम छटा निराली
पूर्वांचल को बना दिया
जिसने घाटी हरियाली |
गाँव पहाड़ीपुर
उपजाता जो केवल अधिकारी
गहमर ग्राम शेरपुर
गाजीपुर सैनिक व्रतधारी |
जयप्रकाश सा इस
मिट्टी ने दिया देश को नायक
अभिनेता जन्माने
वाला, मधुशाला का गायक |
पूर्वांचल कि मस्ती
ने अब्दुल हमीद – सा वीर दिया
गंगा गोमती, और
घाघरा सींच रही तस्वीर दिया |
क़ायम रक्खी है अब तक
जिसने अपनी परिपाटी को
शत-शत वंदन 'कंचन'
करता पूर्वांचल की माटी को |
रचनाकाल १९९४ ई.
....वाह!
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