उलट गई संवेदना ,पलट गया व्यवहार। मात पिता लगने लगे ,अब बासी अखबार।। राजा वेश्या अग्नि यम ,बच्चा याचक चोर। पर पीड़ा जाने नहीं ,नहीं आंख की लोर।। सत्ता पाने के लिए, सब पागल बेचैन। मिर्चा को गुड़ बोलते ,दिन को कहते रैन।।
नयनों की प्याली में अमृत नयनों की प्याली में अमृत बार - बार तुमने परसा है। लुक छिपकर तेरा वह मिलना गन्धित पुष्प कली सा खिलना कुंचित केशों का विन्यास तेरे अधरों का मधुहा स याद मुझे है, लखने खातिर बार - बार ये मन तरसा है। नयनों की प्याली में अमृत बार - बार तुमने परसा है। चैत चाँदनी की वे रातें तेरी मधुर - मधुर वे बातें अमराई के मध्य बोलना मीठा - मीठा दर्द घोलना खेल - खेल में बीत गये दिन आखों ने सब कुछ दरसा है। नयनों की प्याली में अमृत बार- बार तुमने परसा है ॥ खुश होना और कभी रिसाना रोब देखाना और मनाना बिन बोले तेरा रह जाना आखों से सब कुछ कह जाना तेरी मनवाली कर - करके , बार - बार ये मन हरषा है। नयनों की प्याली में अमृत बार- बार तुमने परसा है ॥ रिस्ते नाते टूट गये सब काफी पीछे छूट गये सब हाथों को ही बस मलना है निरा अकेले ही चलना है । जब -जब याद किया मैंने इन आखों से ही मन बरषा है। नयनों की प्याली में अमृत बार- बार तुमने परसा है ॥
कौन किससे प्रथम रूठा गीत को संगीत में तुम बाँधकर कर दो अनूठा । देख करके छवि तुम्हारी होश खो तारे पड़े हैं मुग्ध होकर भाव विह्वल कवि अथक हारे पड़े हैं गीत को तुम प्रीत पूर्वक निज अधर से कर दो जूठा । गीत को संगीत में तुम बाँधकर कर दो अनूठा । । मन लुभाने के लिए साधन यहाँ कितने बने हैं फूल पाती तरु लता - जलजात ये जितने घने हैं । देखने पर सत्य तुम , लगता है यह संसार झूठा । गीत को संगीत में तुम बाँधकर कर दो अनूठा । । मधुर अनुपम राग से अनुराग की पीयूष धारा कर प्रवाहित चिद्गमन में सींच दो चेतन हमारा । प्रीत तेरी मृदुलता जीवन हमारा वृक्ष ठूँठा । गीत को संगीत में तुम बाँधकर कर दो अनूठा । । गीत यह प्रत्यक्ष मेरे प्रेम की तस्वीर है नयनशर से विध्द मेरे चित्त की मृदुपीर है । तुम मुझे बस यह बता दो कौन किससे प्रथम रूठा । गीत को संगीत में तुम बाँधकर कर दो अनूठा । ।
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