संदेश

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संस्कृति प्रकाशन के उद्घाटन के अवसर पर  डॉ. सूर्यकुमार शुक्ल आई. पी. एस. को  स्मृति चिन्ह प्रदान करते हुए  डॉ. उमाशंकर चतुर्वेदी कंचन     

नर्मदा किनारे

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नर्मदा किनारे शशिकांत द्विवेदी के साथ उमाशंकर चतुर्वेदी 'कंचन'

धुआंधार जबलपुर में

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धुआंधार जबलपुर में शशिकांत द्विवेदी के साथ उमाशंकर चतुर्वेदी 'कंचन'

बरमान,नरसिंहपुर

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बरमान,नरसिंहपुर निवासी श्री लालजी शर्मा के साथ डाक्टर उमाशंकर चतुर्वेदी ' कंचन '

पंडित पद्माकर चौबे के जन्मदिन पर

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पंडित पद्माकर चौबे  के जन्मदिन पर काव्यपत्र समर्पित करते हुए डाक्टर उमाशंकर चतुर्वेदी 'कंचन '
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प्रो . हरिप्रसाद अधिकारी को अभिनन्दन पत्र सौंपते कविवर 'कंचन '
लाली लख  सब  कर रहे भूल - भूल कर भूल नहीं  पता  निर्गन्ध हैं      ये  सेमर   के फूल चौकठ, देहरी जब  रहा  तब थी उसकी लाज  चौकठ  बिना  कपाट  है   नये - नये  अंदाज   स्वारथ में तन मन  बिका टूट गया व्यवहार  मुक्त   सभी   के   मन    हुए   टूटे    मुक्ताहार  कौन जानता किस समय घटना घटे विचित्र  मित्र  शत्रु   बन   जाएगा,  शत्रु   बनेगा  मित्र  अनुसुय्या  सीता  गयीं  चला  गया  वह राज  पत्नी  व्रत  हैं  माँगती  सभी  लड़कियाँ  आज