नयनों की प्याली में अमृत
नयनों की प्याली में अमृत नयनों की प्याली में अमृत बार - बार तुमने परसा है। लुक छिपकर तेरा वह मिलना गन्धित पुष्प कली सा खिलना कुंचित केशों का विन्यास तेरे अधरों का मधुहा स याद मुझे है, लखने खातिर बार - बार ये मन तरसा है। नयनों की प्याली में अमृत बार - बार तुमने परसा है। चैत चाँदनी की वे रातें तेरी मधुर - मधुर वे बातें अमराई के मध्य बोलना मीठा - मीठा दर्द घोलना खेल - खेल में बीत गये दिन आखों ने सब कुछ दरसा है। नयनों की प्याली में अमृत बार- बार तुमने परसा है ॥ खुश होना और कभी रिसाना रोब देखाना और मनाना बिन बोले तेरा रह जाना आखों से सब कुछ कह जाना तेरी मनवाली कर - करके , बार - बार ये मन हरषा है। नयनों की प्याली में अमृत बार- बार तुमने परसा है ॥ रिस्ते नाते टूट गये सब काफी पीछे छूट गये सब हाथों को ही बस मलना है निरा अकेले ही चलना है । जब -जब याद किया मैंने इन आखों से ही मन बरषा है। नयनों की प्याली में अमृत बार- बार तुमने परसा है ॥
बहुत सुन्दर .. लगता है तीर्थाटन पर निकले हैं. एक हाथ में तो पानी का बोतल है पर दूसरे में क्या है?
जवाब देंहटाएंजी हाँ चारो धाम की यात्रा पर पिछले माह गए थे
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