नयनों की प्याली में अमृत
नयनों की प्याली में अमृत नयनों की प्याली में अमृत बार - बार तुमने परसा है। लुक छिपकर तेरा वह मिलना गन्धित पुष्प कली सा खिलना कुंचित केशों का विन्यास तेरे अधरों का मधुहा स याद मुझे है, लखने खातिर बार - बार ये मन तरसा है। नयनों की प्याली में अमृत बार - बार तुमने परसा है। चैत चाँदनी की वे रातें तेरी मधुर - मधुर वे बातें अमराई के मध्य बोलना मीठा - मीठा दर्द घोलना खेल - खेल में बीत गये दिन आखों ने सब कुछ दरसा है। नयनों की प्याली में अमृत बार- बार तुमने परसा है ॥ खुश होना और कभी रिसाना रोब देखाना और मनाना बिन बोले तेरा रह जाना आखों से सब कुछ कह जाना तेरी मनवाली कर - करके , बार - बार ये मन हरषा है। नयनों की प्याली में अमृत बार- बार तुमने परसा है ॥ रिस्ते नाते टूट गये सब काफी पीछे छूट गये सब हाथों को ही बस मलना है निरा अकेले ही चलना है । जब -जब याद किया मैंने इन आखों से ही मन बरषा है। नयनों की प्याली में अमृत बार- बार तुमने परसा है ॥
धीरे-धीरे सुंदर चित्रों का पिटारा खोल रहे हैं।:)
जवाब देंहटाएंसच यह है कि आप की दृष्टि अच्छी है
हटाएंtaत्स्वीर तो सुन्दर है ही लेकिन पीछे की बैक ग्राऊँड भी बहुत अच्छी है।शुभकामनायें।
जवाब देंहटाएंनिर्मल मन से निर्मला जी आप की शुभकामना
हटाएंप्राप्त होने आ गयी है प्यारी -- प्यारी भावना
है प्रकृति की गोद सुंदर भावना मन मोद सुंदर
इस लिए उस चित्र पर आप का उद्बोध सुंदर