प्रथम भाग के आगे - **************** ' हाँ जी।' 'राम - राम बड़े साधु आदमी थे विचारे।अंग्रेजों के गदर में मारे गये, जाने किस पापी हत्यारे ने मार डाला ऐसे गऊ आदमी को, हमको बड़ा मानते थे विचारे।' पुनः कुछ देर मौन छाया रहा।फिर रिक्शेवाले ने ही पूछा-'अच्छा तो यहाँ क्या करने आये हैं आप ? कोई काम है या यूँ ही घूमने?' 'आया तो था पढ़ने मगर.....।' 'बोलिये बोलिये ,रुक क्यों गये?' 'क्या बताऊँ, छोड़ो जाने दो।' ' क्यों, क्या बात है ? दुखी लग रहे हैं आप।' 'हाँ भाई, खैर सुनो! -जब सारी बातें जानते ही हो गाँव घर की तो तुमसे क्या छिपाना,इसी साल मैंने गाँव के कालेज से बी.ए.प्रथम वर्ष की परीक्षा उत्तीर्ण की है, और जब आगे पढ़ने के लिये फाइनल में नाम लिखाने को कहा चाचा जी से तो वे नाराज हो गये,और कहने लगे मैं तुम्हारी पढ़ाई - वढ़ाई का खर्च न दे सकूँगा।पढ़कर वैरिस्टर नहीं हो जाओगे, इतना बहुत है काम भर के लिये, चलो खेती बारी का काम देखो।अपनी मनवाली करनी ...